हाल ही में TED की conference सुनी और जाना छोटी छोटी बच्चियों और लड़कियों का हाल इस देश में क्या हें ? हर स्थिति के आगे एक सवालिया निशान और फिर आगे कोई भी जवाब नहीं बस यही जिन्दगी हें बहुत सी बच्चियों और लड़कियों और औरतों की इस देश में |
एक नाम जो बड़े गर्व से ऊपर उठा इस conference में वो था डॉ. सुनीता कृष्णन | यही वो नाम हें जो हजारों लड़कियों का जीने का सहारा बन गया | 3 Idiots का dialog "एक दिन तुम पछताओगे की गाडी दरवाजे पर खडी थी और चिट्ठी हाथ में थी बस जरा सी हिम्मत की होती तो जिन्दगी कुछ और ही होती " शायद ऐसी ही इन्सान की असली जन्दगी से लिया गया था | अगर डॉ. सुनीता में वो हिम्मत नहीं होती तो वो नहीं होता जो करके आज कई लड़कियों के लिए एक भगवान से बढकर हें और हमारे लिए एक प्रेरणा से बढ़कर |
अकेली डॉ. सुनीता कृष्णन ने TED के जरिये 3200 से ज्यादा बच्चियों और लड़कियों को बचाया जिनका बलात्कार हुआ और शोषण किया गया था | कई बच्चियों का तो ना जाने कितने लोगो ने शोषण किया और बेबस Railway tracks और सड़कों पर छोड़ दिया | इनमे में ऐसी बच्चिया भी हें जो केवल 3-4 साल की थी जब उनको बचाया गया था | ऐसे लोगों के बारे सोचके भी घिन्न आ जाती हें क़ि हमारे देश में ऐसे लोग भी हें | बच्चों की जिस उम्र में हम भगवान देखते हें उनपर ऐसा वहशीपन ना जाने कहाँ से लोगों में आ गया क़ि कच्ची उम्र की बच्चियों की जिन्दगी के साथ खिलवाड़ करने में भी नहीं चुकते ?
खुद डॉ. सुनीता कृष्णन के साथ 8 लोगों ने बलात्कार किया था | वो दो साल तक खुद इस हादसे से उभर नहीं पाई मगर उन्होंने सोच लिया था क़ि उन बच्चियों और लड़कियों की जिन्दगी बचानी हें जो इस तरह के हादसे का शिकार हो जाती हें या उनको तेयार करना ताकि वो ऐसे हादसों का शिकार ना हो | आज वो उन लोगों की प्रेरणा हें जो इस देश से ऐसी गंदगी साफ करने में लगे हुए हें | आज से 25 साल पहले अगर उन्होंने ये हिम्मत नहीं की होती तो ना जाने कितनी लडकियों की जिन्दगी बर्बाद हो जाती |
अगर हिसाब लगाया जाये तो हर साल उन्होंने 128 और हर तीसरे दिन एक लडकी क़ि जिन्दगी बचायी हें | आज उनको सभी सम्मान के साथ देखते हें मगर एक वक़्त था जब लोग उन्हें एक घ्रणित नज़र से देखते थे | उनकी हिम्मत का जवाब नहीं |
दूसरी तरफ आज जो सबसे बड़ी समस्या हें वो ये क़ि जब भी कोई ऐसी स्थिति में होतें हें वो अपनी आवाज़ को दबा देते हें क्यूंकि हमारा समाज ऐसे लोगों का जीने दुश्वार कर देता हें जो इन हादसों का शिकार हो जाता हें | बहुत कम लोग हें जो किसी ऐसी स्थिति में अपनी आवाज़ उठा के दुनियाके सामने खड़े होने की हिम्मत रखते हें
हमारे देश में शिकार खुद गुनाहगार बन जाता हें | यही वजह हें क़ि बहुत कम लोगो को हमारे देश में सजा मिल पाती हें | सच ही हें बलात्कार करने वाले को मौत से बड़ी कोई सजा हो तो वही मिलनी चाहिए |
पिछले 25 सालों में डॉ. कृष्णन ने जिन्दगी को बहुत बारीकी से देखा, बचाया और उन बेबस लड़कियों को फिर से बेहतर जिन्दगी देने में जी जान लगा दी | बहुत कम लोग हें ऐसे इस देश में जो अपना दर्द भूल कर लोगो की जिन्दगी बदलना चाहते हें |
ऐसे लोगों की जिन्दगी बस ऐसे चलती हें -
मंजिलें दूर हें मगर अभी चलते रहना हें थकना नहीं, दिल में दर्द में मगर इस जूनून को अभी थमना नहीं |
चलो छोड़ के दुनिया और हम उनका हाथ पकडे, समेटनी हें जिनको ये बिखरी हुई जिन्दगी टुकड़े टुकड़े ||
उनको सुनकर दिल से एक ही आवाज़ आती हें सलाम डॉ. सुनीता कृष्णन, We are proud of you. You are the real Indian woman. Many many thanks to TED who supports Dr. Sunitha.
एक नाम जो बड़े गर्व से ऊपर उठा इस conference में वो था डॉ. सुनीता कृष्णन | यही वो नाम हें जो हजारों लड़कियों का जीने का सहारा बन गया | 3 Idiots का dialog "एक दिन तुम पछताओगे की गाडी दरवाजे पर खडी थी और चिट्ठी हाथ में थी बस जरा सी हिम्मत की होती तो जिन्दगी कुछ और ही होती " शायद ऐसी ही इन्सान की असली जन्दगी से लिया गया था | अगर डॉ. सुनीता में वो हिम्मत नहीं होती तो वो नहीं होता जो करके आज कई लड़कियों के लिए एक भगवान से बढकर हें और हमारे लिए एक प्रेरणा से बढ़कर |
अकेली डॉ. सुनीता कृष्णन ने TED के जरिये 3200 से ज्यादा बच्चियों और लड़कियों को बचाया जिनका बलात्कार हुआ और शोषण किया गया था | कई बच्चियों का तो ना जाने कितने लोगो ने शोषण किया और बेबस Railway tracks और सड़कों पर छोड़ दिया | इनमे में ऐसी बच्चिया भी हें जो केवल 3-4 साल की थी जब उनको बचाया गया था | ऐसे लोगों के बारे सोचके भी घिन्न आ जाती हें क़ि हमारे देश में ऐसे लोग भी हें | बच्चों की जिस उम्र में हम भगवान देखते हें उनपर ऐसा वहशीपन ना जाने कहाँ से लोगों में आ गया क़ि कच्ची उम्र की बच्चियों की जिन्दगी के साथ खिलवाड़ करने में भी नहीं चुकते ?
खुद डॉ. सुनीता कृष्णन के साथ 8 लोगों ने बलात्कार किया था | वो दो साल तक खुद इस हादसे से उभर नहीं पाई मगर उन्होंने सोच लिया था क़ि उन बच्चियों और लड़कियों की जिन्दगी बचानी हें जो इस तरह के हादसे का शिकार हो जाती हें या उनको तेयार करना ताकि वो ऐसे हादसों का शिकार ना हो | आज वो उन लोगों की प्रेरणा हें जो इस देश से ऐसी गंदगी साफ करने में लगे हुए हें | आज से 25 साल पहले अगर उन्होंने ये हिम्मत नहीं की होती तो ना जाने कितनी लडकियों की जिन्दगी बर्बाद हो जाती |
अगर हिसाब लगाया जाये तो हर साल उन्होंने 128 और हर तीसरे दिन एक लडकी क़ि जिन्दगी बचायी हें | आज उनको सभी सम्मान के साथ देखते हें मगर एक वक़्त था जब लोग उन्हें एक घ्रणित नज़र से देखते थे | उनकी हिम्मत का जवाब नहीं |
दूसरी तरफ आज जो सबसे बड़ी समस्या हें वो ये क़ि जब भी कोई ऐसी स्थिति में होतें हें वो अपनी आवाज़ को दबा देते हें क्यूंकि हमारा समाज ऐसे लोगों का जीने दुश्वार कर देता हें जो इन हादसों का शिकार हो जाता हें | बहुत कम लोग हें जो किसी ऐसी स्थिति में अपनी आवाज़ उठा के दुनियाके सामने खड़े होने की हिम्मत रखते हें
हमारे देश में शिकार खुद गुनाहगार बन जाता हें | यही वजह हें क़ि बहुत कम लोगो को हमारे देश में सजा मिल पाती हें | सच ही हें बलात्कार करने वाले को मौत से बड़ी कोई सजा हो तो वही मिलनी चाहिए |
पिछले 25 सालों में डॉ. कृष्णन ने जिन्दगी को बहुत बारीकी से देखा, बचाया और उन बेबस लड़कियों को फिर से बेहतर जिन्दगी देने में जी जान लगा दी | बहुत कम लोग हें ऐसे इस देश में जो अपना दर्द भूल कर लोगो की जिन्दगी बदलना चाहते हें |
ऐसे लोगों की जिन्दगी बस ऐसे चलती हें -
मंजिलें दूर हें मगर अभी चलते रहना हें थकना नहीं, दिल में दर्द में मगर इस जूनून को अभी थमना नहीं |
चलो छोड़ के दुनिया और हम उनका हाथ पकडे, समेटनी हें जिनको ये बिखरी हुई जिन्दगी टुकड़े टुकड़े ||
उनको सुनकर दिल से एक ही आवाज़ आती हें सलाम डॉ. सुनीता कृष्णन, We are proud of you. You are the real Indian woman. Many many thanks to TED who supports Dr. Sunitha.
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