Friday, November 12, 2010

लिखा जो मेने

फलक के तारे तेरी आँखों में टिम टिम |
सावन के बादल तेरी बाँहों में रिम झिम ||
 दिन का उजाला तेरी गोद में छाया सा,
रात का अँधेरा भी तेरे संग रौशनी मद्धम ||

क्यों तुझे खुदा से बढ़कर माना हमने |
तुझपर सबसे ज्यादा हक़ माना हमने ||
रहे कोई तेरे मेरे दरमियाँ केसे मुमकिन हें |
तू हें अन्दर मेरे ये आज जाना हमने ||

अब जो ये मेरी जिन्दगी अलग हें |
मेरी खुद से जो ये दोस्ती अलग हें ||
रहे तेरी याद के गुलाब मेरी किताब में ऐसे |
तेरी खुश्बुओ में आज मेरी हस्ती अलग हें ||
क्या कहे की क्यों अब ये जिन्दगी अलग हें |||

Chandresh - थोड़ी सी कलम थोड़ी सी स्याही, मंजिलें मुश्किल मगर में हूँ राही |
                  मुझे रुकना नहीं किसी एक जगह, उसने की हें कहीं थमने से मनाही ||

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