आजकल ये दुनिया ही एक टीवी सी लगती हें जहा बहुत कुछ हो रहा हें मगर हमें कुछ फर्क ही नहीं पड़ता बस हम देखते रहते हें बिना सोचे समझे| जब कोई हमारे बगल से निकलता हें तो ऐसा लगता हमें कुछ मतलब ही नहीं होता हम ऐसे ही थे या अब हो गए पता नहीं. ना जाने किस दुनिया में हम खोये रहते हें कभी सोचता हूँ एक वक़्त था जब लोग पडोसी हुआ करते थे, आज पड़ोस मैं अजनबी रहा करते है. जिनकी आँखों में ख़ुशी देख कर ख़ुशी होती थी वही आज जलन होने लगती हें. जहाँ दुआ में रब हुआ करता था अब उस में सब हुआ करता हें गुस्सा भी, नफ़रत भी, धोखा भी, स्वार्थ भी मांगना तो खेर होता ही हें | जहाँ थोडा सा वक़्त अपनों के लिए हुआ करता था, आज वो टीवी रेडियो में निकल जाता हें. अब में क्या कह रहा हूँ इसके बारे में एक बात कहूँ- एक कहावत हे english मैं जो कहती हे -
“I am so clever that sometimes I don't understand a single word of what I am saying.”
सच ही हैं कभी कभी हम क्या कह रहे हें हमें पता ही नहीं होता|
मेने के गाँव की वो जिन्दगी भी देखी हें जहा दिनभर में सिर्फ एक बस कसबे की तरफ जाती थी और शाम को वही बस लोट के आती थी और मेट्रो की व्यस्त जिन्दगी भी, जहा एक मिनट में 286 कारें हमारे पास से गुजर जाती हें दोंनो जिन्दगी में फर्क कुछ भी नहीं रहा ना उस गाँव में कभी सुकून मिला ना उस शहर में कभी सुख मिला | गाँव में एक सवारी के लिए बस 30 मिनट ऐसे ही रुक जाती थी और शहर में सामने खड़े हो जाओ तब भी कोई नहीं रुकेगा | ये सब में कहा रहा हूँ तो इसलिए क़ि कोई हें जो इन सब से गुजर के आज इस मुकाम पर हें जहा सब उनका सम्मान करते हें |
बात कर रहा हु श्री मनमोहन सिंह की जो हमारे प्रधानमंत्री हें एक खामोश सा इन्सान जो अपने अन्दर ना जाने कितनी सोच विचार और बाते ले के इस देश को चला रहा हें| दुनिया लाख कहे वो कटपुतली प्रधानमंत्री हें मगर ना कभी उन्होंने विरोध किया ना किसी को कोई जवाब दिया | कहीं अन्दर उनके एक जज्बात हें जो उनको प्रेरित करता हें क़ि भारत का आने वाला कल एक बेहतर कल हो | ये उनकी बातो से और उनके फैसलों से साफ पता चलता हें | US president Obama यूँही उनकी तारीफ़ नहीं करते क़ि वो उनको गुरु मानते हें वो इसलिए क़ि recession के दौरान भी ये देश डगमगाया नहीं तो कहीं ना कहीं इसमें हमारे प्रधानमंत्री की उस खामोश सी आँखों और हलकी सी मुस्कान में इसका जवाब छिपा हें | बस काम करना यही उनका शौक हें और बेहतर काम से ही उनको ये जगह मिली हें |
एक नजर जरा उनके अब तक क़ि पोस्ट पर डालो-
- A (Hons) in Economics 1952; MA First Class in Economics, 1954 Panjab University, Chandigarh, India
- Honours degree in Economics, University of Cambridge - (St John's College; 1957)
- Senior Lecturer, Economics (1957–1959)
- Reader (1959–1963)
- Professor (1963–1965)
- Professor of International Trade (1969–1971)
- DPhil in Economics, University of Oxford - (Nuffield College; 1962)
- Delhi School of Economics, University of Delhi
- Honorary Professor (1996)
- Chief, Financing for Trade Section, UNCTAD, United Nations Secretariat, Manhattan, New York
- 1966 : Economic Affairs Officer 1966
- Economic Advisor, Ministry of Foreign Trade, India (1971–1972)
- Chief Economic Advisor, Ministry of Finance, India, (1972–1976)
- Honorary Professor, Jawaharlal Nehru University, New Delhi (1976)
- Director, Reserve Bank of India (1976–1980)
- Director, Industrial Development Bank of India (1976–1980)
- Secretary, Ministry of Finance (Department of Economic Affairs), Government of India, (1977–1980)
- Governor, Reserve Bank of India (1982–1985)
- Deputy Chairman, Planning Commission of India, (1985–1987)
- Secretary General, South Commission, Geneva (1987–1990)
- Advisor to Prime Minister of India on Economic Affairs (1990–1991)
- Finance Minister of India, (21 June 1991 – 15 May 1996)
- Leader of the Opposition in the Rajya Sabha (1998–2004)
- Prime Minister of India (22 May 2004 – Present)
सीधा सा एक इन्सान जो आज दुनिया को नया रास्ता दिखा रहा हें, कुछ लोग सच में बहुत ही अलग होते हें Be proud that he is our prime minister. जाने कौनसी ताकत हें जो सालों से उनको मुस्कुरा के सबसे मिलने की खूबी देती हें खामोश रह के सब कहने की ये कला सबको कहाँ आती हें
मुझे भी नहीं आती......
Chandresh -not as always, में भी खामोश सब देख रहा हूँ !
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